दोस्तों, लिखित अभिव्यक्ति का मतलब बस इतना है कि जो कुछ भी हमारे दिमाग में चल रहा है, उसे शब्दों में कागज़ पर या फोन पर उतार देना। ये कोई बहुत बड़ी-बड़ी बात नहीं है, जैसे हम रोज़ दोस्तों से बात करते हैं वैसे ही लिख देते हैं। पर एक फर्क है जो लिखा हुआ होता है वो हमेशा के लिए रह जाता है। मैं जब छोटा था तो अपनी एक छोटी-सी डायरी रखता था। उसमें बस ऐसे ही अपना मन का हाल लिख डालता था। फिर जब बाद में पढ़ता था तो लगता था अरे ये तो मैंने सच में सोचा था!

आजकल तो सब ईमेल भेजते हैं, इंस्टाग्राम पर कैप्शन लिखते हैं, ब्लॉग बनाते हैं ये सब लिखित अभिव्यक्ति ही है। इससे हम बिना सामने मिले भी किसी से जुड़ जाते हैं। अगर आप भी अभी शुरू कर रहे हो तो बस सोचो, एक साधारण सा नोट बना लो तो कितनी चीज़ें आसान हो जाती हैं। जैसे दुकान जाने से पहले लिस्ट बना ली या दोस्त को बर्थडे विश लिख दिया। लिखने से हमारी लाइफ में सब कुछ थोड़ा व्यवस्थित लगने लगता है। ये सिर्फ़ अक्षर नहीं होते, हमारे विचारों का पक्का रूप होते हैं।
दैनिक जीवन में लिखित अभिव्यक्ति की भूमिका
रोज़ की ज़िंदगी में लिखना बहुत-बहुत काम आता है। मान लो आप मार्केट जा रहे हो और कुछ भी लिखकर नहीं रखा, तो पक्का आधा सामान भूल आएंगे। पर अगर छोटी-सी लिस्ट बना ली तो सब कुछ ठीक-ठाक मिल जाता है। घर में भी कभी मम्मी-पापा को मैसेज छोड़ना हो या कोई काम याद रखना हो तो लिख देना सबसे बढ़िया तरीका है। मैंने कई लोगों को देखा है जो रोज़ शाम को डायरी में थोड़ा-सा लिखते हैं। बस अपना मन का बोझ उतार देते हैं। इससे तनाव भी कम लगता है।
डॉक्टर लोग भी कहते हैं कि journaling यानी डायरी लिखना दिमाग़ के लिए बहुत अच्छा होता है। ये ऐसा है जैसे खुद से ही बात कर रहे हो। सोशल मीडिया पर भी जब पोस्ट लिखते हैं तो ध्यान रखना पड़ता है कि सब लोग पढ़ेंगे, इसलिए सही शब्द चुनने चाहिए। लिखने से टाइम भी बचता है। जैसे बैंक में फॉर्म भरते वक्त या डॉक्टर को अपनी तकलीफ़ बताते वक्त सब कुछ साफ़-साफ़ लिख दो तो गड़बड़ होने का चांस बहुत कम हो जाता है। बस छोटी-छोटी आदतों से शुरू होता है जैसे पढ़ाई के नोट्स बनाना, टू-डू लिस्ट बनाना। धीरे-धीरे ये आदत हमारी लाइफ का हिस्सा बन जाती है।
शिक्षा में लिखित अभिव्यक्ति का महत्व
स्कूल-कॉलेज में तो लिखित अभिव्यक्ति बिल्कुल बेसिक चीज़ है। निबंध लिखना, परीक्षा में लंबे जवाब देना, प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाना – सब इसी पर टिका होता है। अगर लिखने में अच्छे हो तो नंबर भी अच्छे आते हैं। मुझे याद है क्लास में जब हम रिपोर्ट बनाते थे और साफ़-सुथरे लिखते थे तो मैम/सर बहुत खुश हो जाते थे। लिखने से हमारी सोच भी तेज़ होती है और साफ़ होती है। किताबें पढ़कर तो जानकारी आती है, पर जब खुद लिखते हैं तो वो जानकारी हमारे दिमाग़ में पक्की हो जाती है।
कॉलेज में तो असाइनमेंट और प्रोजेक्ट रिपोर्ट लिखना पड़ता ही है, इससे रिसर्च करना भी सीखते हैं। टीचर लोग अक्सर कहते हैं कि अच्छा लिखने वाला बच्चा चीज़ों को गहराई से समझता है। जैसे इतिहास की कोई घटना को बस पढ़ने से नहीं, लिख-लिखकर समझने से बहुत अच्छे से याद रहती है।
आजकल ऑनलाइन क्लास में भी फोरम पर लिखकर डिस्कशन करना पड़ता है। इससे दूसरों की बातें समझने का भी मौका मिलता है। अगर कोई बच्चा लिखने में कमज़ोर है तो उसकी पढ़ाई पर असर पड़ता है। इसलिए छोटी क्लास से ही थोड़ा-थोड़ा लिखने की आदत डालनी चाहिए। बस छोटे-छोटे पैराग्राफ़ से शुरुआत करो। शिक्षा में लिखना सिर्फ़ नंबर लाने का तरीका नहीं, बल्कि जो सीखा है उसे हमेशा के लिए अपना बनाने का रास्ता है।
पेशेवर जीवन में लिखित अभिव्यक्ति की उपयोगिता
नौकरी या बिजनेस में लिखना तो जैसे रोज़ का काम बन जाता है। ईमेल भेजना, ऑफिस में रिपोर्ट तैयार करना, मीटिंग के लिए प्रेजेंटेशन स्लाइड्स बनाना ये सब लिखित अभिव्यक्ति ही है। अगर आप साफ़-सुथरा और क्लियर लिखते हो तो बॉस या क्लाइंट बहुत इम्प्रेस हो जाते हैं। मुझे याद है, जब मैंने पहली बार जॉब के लिए सीवी बनाया था, तो मैंने बहुत ध्यान रखा कि सब कुछ छोटा, साफ़ और पॉइंट टू पॉइंट हो। उसकी वजह से इंटरव्यू में अच्छा रिस्पॉन्स मिला।
प्रोफेशनल लाइफ में गलतफहमी से बचने के लिए लिखित चीज़ें बहुत ज़रूरी होती हैं। जैसे कोई कॉन्ट्रैक्ट या एग्रीमेंट हमेशा लिखित में होता है, ताकि बाद में कोई झगड़ा न हो। मार्केटिंग वाले लोग ब्लॉग या ऐड कॉपी लिखकर प्रोडक्ट बेचते हैं। फ्रीलांसर हो तो क्लाइंट से सारे मैसेज लिखित रखो, ट्रस्ट बनता है। टीम में काम करते हो तो मीटिंग के बाद नोट्स बना लो, सबको पता रहता है क्या करना है. लिखने से करियर में आगे बढ़ने में भी मदद मिलती है, जैसे परफॉर्मेंस रिव्यू लिखना पड़ता है। अगर शब्द गलत चुन लिए तो मौका हाथ से निकल सकता है। बिजनेस में प्रपोजल या लेटर अच्छा लिखा तो क्लाइंट आसानी से मान जाता है।
व्यक्तिगत विकास में लिखित अभिव्यक्ति का योगदान
अपने आप को बेहतर बनाने में लिखना बहुत बड़ा रोल प्ले करता है। जब हम अपनी डायरी में रोज़ का कुछ लिखते हैं तो खुद से बात करने जैसा लगता है। इससे अपनी गलतियां समझ आती हैं और अगली बार सुधारने की कोशिश करते हैं। बहुत से बड़े लेखक कहते हैं कि लिखना उनके लिए थेरेपी की तरह है, सारे इमोशन्स बाहर निकल जाते हैं। लक्ष्य बनाने में भी लिखना कमाल करता है। जैसे न्यू ईयर में रेजोल्यूशन लिखकर रख लो, तो उन्हें फॉलो करने का मन करता है।
किताब पढ़ते हो तो उसकी छोटी-सी समरी लिख लो, ज्ञान पक्का हो जाता है। कहानियां या कविताएं लिखने से दिमाग़ की क्रिएटिविटी बढ़ती है। अगर आप थोड़े शर्मीले हो तो लिखकर अपनी बात रखना आसान लगता है। ऑनलाइन फोरम या ग्रुप में लिखो तो नए लोग मिलते हैं, नए दोस्त बनते हैं। लिखना हमें कॉन्फिडेंस देता है और समझदार बनाता है। बस शुरुआत छोटी करो, रोज़ सिर्फ 10 मिनट लिखने की आदत डाल लो, धीरे-धीरे बहुत फर्क पड़ेगा।
लिखित अभिव्यक्ति के फायदे
लिखने के ढेर सारे फायदे हैं। सबसे बड़ा ये कि लिखा हुआ हमेशा रहता है, बोली हुई बात तो उड़ जाती है। इससे गलतफहमियां बहुत कम होती हैं। कानूनी कामों में तो दस्तावेज़ लिखित होने चाहिए, नहीं तो मुश्किल हो जाती है। लिखते वक्त हम अपने विचारों को एक क्रम में रखते हैं, सोच बहुत क्लियर हो जाती है। ईमेल या मैसेज से दुनिया के किसी भी कोने में अपनी बात पहुंचा सकते हैं।
ये रचनात्मकता भी बढ़ाता है, लेखक इसी से शुरू होते हैं। पढ़ाई और जॉब में सफल होने में बहुत मदद करता है। डायरी लिखने से मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है, तनाव और डिप्रेशन कम होता है। पैसे के प्लान, बजट सब लिखकर रखो तो आसानी रहती है। और सबसे अच्छी बात, आपका लिखा हुआ दूसरों को भी इंस्पायर करता है, जैसे कोई ब्लॉग पढ़कर कोई नई चीज़ सीख लेता है। सच में, लिखना लाइफ को बहुत बेहतर बना देता है।
लिखित अभिव्यक्ति सुधारने के तरीके
लिखने में बेहतर होना चाहते हो तो कुछ आसान तरीके हैं। सबसे पहले बहुत पढ़ो, अच्छी किताबें, न्यूज़पेपर, ब्लॉग जितना पढ़ोगे उतने अच्छे शब्द आएंगे। रोज़ डायरी लिखो, बस छोटी-छोटी बातें जैसे दिन में क्या हुआ। ऑनलाइन फ्री कोर्स बहुत हैं, उनसे सीख सकते हो। जो भी लिखो, दोस्तों को दिखाओ, उनका फीडबैक बहुत काम आएगा। बेसिक ग्रामर रूल्स सीख लो, वो ज़रूरी हैं। छोटे-छोटे टारगेट रखो, जैसे हफ्ते में एक छोटा ब्लॉग या पैराग्राफ़। लिखने के बाद हमेशा दोबारा पढ़ो और जहां गलती लगे सुधार दो। ये सब तरीके आसान हैं और सच में काम करते हैं, बस लगातार करते रहो।
निष्कर्ष
लिखित अभिव्यक्ति हमारी ज़िंदगी का एक बहुत बड़ा और खास हिस्सा है। ये हमें बेहतर तरीके से बात करने, पढ़ाई करने, करियर बनाने और खुद को समझने में मदद करती है। अगर आप आज से ही थोड़ा-थोड़ा लिखना शुरू कर दोगे, तो धीरे-धीरे बहुत सारे फायदे दिखने लगेंगे। याद रखना, लिखना कोई जन्मजात टैलेंट नहीं है, ये बस एक स्किल है जो रोज़ के अभ्यास से आती है। तो बस शुरू कर दो, एक छोटा सा पैराग्राफ़ लिखकर, और देखो कितना अच्छा लगता है!
