खुद को बेहतर कैसे बनाएँ? सरल और व्यावहारिक टिप्स

खुद को बेहतर कैसे बनाएँ

दोस्तों! आजकल सबके मन में एक ही ख्याल आता रहता है “काश मैं थोड़ा बेहतर इंसान बन जाऊं…” लेकिन सच बताऊं, ज्यादातर लोग सोचते तो बहुत हैं पर शुरू कैसे करें, ये समझ ही नहीं पाते। अगर आप भी ऐसे ही हैं, बस सोचते रहते हैं पर कुछ होता नहीं तो फिर आपको ये समझना होगा कि “खुद को बेहतर बनाना कोई कोई जादू की छड़ी घुमाने जैसा नहीं है। ये बस रोज़ थोड़ा-थोड़ा सुधार करने की आदत है। इस आर्टिकल में मैं आपको बताऊँगा कि ये सब कैसे शुरू कर सकते हैं।

खुद को बेहतर कैसे बनाएँ

बेहतर बनना क्या होता है?

सबसे पहले तो ये समझ लो कि बेहतर बनने का मतलब क्या होता है? मतलब ये नहीं कि अगले हफ्ते से तुम परफेक्ट हो जाओगे, सब कुछ सही कर लोगे। नहीं! इसका मतलब बस इतना है कि आज जितना हूं, कल उससे थोड़ा सा बेहतर बन जाऊं। जैसे थोड़ा ज्यादा समझ वाला, थोड़ा शांत रहने वाला, थोड़ा मेहनती, या थोड़ा अच्छा इंसान। बस रोज़ 1% भी सुधार करो तो देखना, एक साल बाद आप खुद को देखकर हैरान रह जाओगे कि कितना आगे निकल आए हो। छोटा-छोटा बदलाव ही असली खेल बदलता है।

खुद को जानना सबसे जरूरी कदम है:

अब सबसे जरूरी बात “पहले खुद को ठीक से जानो”। बिना ये पता चले कि मैं अभी कहां खड़ा हूं, आगे का रास्ता कैसे चुनेंगे? इसलिए रोज़ सिर्फ 10-15 मिनट निकालो, अकेले बैठो और खुद से ईमानदारी से ये सवाल पूछो। मेरी अच्छी बातें क्या-क्या हैं? जिनमें मैं कमजोर हूं वो क्या हैं? मेरी सबसे खराब आदतें कौन-कौन सी हैं जो मुझे पीछे खींच रही हैं? और ज्यादातर समय मेरे दिमाग में क्या चलता रहता है? सब कुछ एक डायरी में लिख लो। ये तुम्हारा पहला नक्शा बनेगा, जैसे गेम में शुरू में मैप मिलता है वैसे ही। बिना मैप के तो भटकते ही रहोगे।

छोटे-छोटे लक्ष्य बनाना सीखें:

फिर आती है सबसे बड़ी गलती जो लगभग सब करते हैं “एकदम से बड़े-बड़े लक्ष्य बना लेते हैं”। जैसे “बस अब से रोज़ 2 घंटे पढ़ाई करूंगा” या “3 महीने में बहुत पैसे कमा लूंगा”। पहले तो कभी 10 मिनट भी नहीं पढ़ते थे और अचानक 2 घंटे? ये तो टूटना ही है। फिर निराशा होती है और सब छोड़ देते हैं। इसलिए आपको छोटे-छोटे लक्ष्य बनाना पड़ेगा। जैसे पहले दिन सिर्फ 10 मिनट पढ़ाई। या रोज़ सुबह उठते ही एक गिलास पानी पीना शुरू कर दो। हर दिन 5 मिनट गहरी सांस लेने की प्रैक्टिस। या एक हफ्ते में बस 2 बुरी आदतें थोड़ी कम करने की कोशिश। जब ये छोटे लक्ष्य पूरे होते हैं तो बहुत अच्छा लगता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और लगता है हां, मैं कर सकता हूं। फिर धीरे-धीरे बड़े लक्ष्य भी आसान लगने लगते हैं।

रोज एक अच्छी आदत जोड़ने की कोशिश करें:

दोस्तों, सबसे बड़ा बदलाव तब आता है जब हम रोज़ बस एक छोटी-सी अच्छी आदत अपनी जिंदगी में जोड़ने की कोशिश करते हैं। ये कोई बड़ा काम नहीं होता, इतना छोटा कि मुश्किल ही न लगे। जैसे सुबह उठते ही बिस्तर ठीक कर देना। शुरू में तो लगेगा इससे क्या फर्क पड़ेगा, लेकिन जब रोज़ करते-करते आदत बन जाती है तो पूरा दिन अच्छा शुरू होने का अहसास होता है। या फिर दिन में एक बार किसी को शुक्रिया बोलना, चाहे वो मम्मी हो जो खाना बनाती हैं या दोस्त जो मदद करता है। छोटी-छोटी बातें हैं पर दिल को अच्छा लगता है।

कुछ और आसान वाली आदतें बताता हूं। जैसे मोबाइल के नोटिफिकेशन बंद करके 30 मिनट बिना फोन के रहना ‘वाह, कितना सुकून मिलता है!’ या रात को सोने से पहले एक डायरी में 3 चीजें लिखना जिनके लिए आज खुश हूं, जैसे अच्छा खाना मिला, कहीं घूमने गए, या दोस्त से बात हो गई। और सबसे सिंपल पानी की बोतल हमेशा साथ रखना और दिन में 8-10 गिलास पीना। ये सब इतने छोटे हैं कि कोई बहाना नहीं बनता, और धीरे-धीरे ये आदतें तुम्हारे पूरे व्यक्तित्व को चमका देती हैं। जैसे कोई धीमा-धीमा जादू हो रहा हो।

बुरी आदतों को कम करने का सही तरीका:

अब बुरी आदतों की बात करते हैं। शुरू में आपको लगेगा कि बुरी आदतें एकदम छोड़ दूंगा, बस आज से बंद! लेकिन ऐसा करने से आप हर बार फेल हो जाएँगे क्योंकि अचानक से छोड़ने से दिमाग रिबेल हो जाता है। इसलिए आपको बुरी आदतों को धीरे-धीरे कम करना होगा। जैसे अगर आप दिन में 50 बार फोन चेक करते हैं तो शुरू करने के लिए पहले 40 बार चेक करिए, फिर 30, फिर 20 ऐसा करना बहुत आसान लगता है। या फिर बुरी आदत की जगह अच्छी आदत डाल दो। फोन उठाने का मन करे तो 10 कदम चल लो या 5 बार गहरी सांस लो। और सबसे महत्वपूर्ण ट्रिगर ढूंढो। जैसे बोरियत में जंक फूड खाने का मन करता है। अब बोर होने पर पानी पिया करिए या थोड़ा टहल लिया करिए। ट्रिगर समझ आ गया तो आदत कमजोर पड़ने लगती है।

अपनी सोच को बेहतर बनाएँ:

कहते हैं कि “हम जैसा सोचते हैं, वैसा ही बनते हैं”। आपके मन भी ऐसे विचार बहुत बार आए होंगे “मुझसे तो कुछ नहीं होगा”, “सब लोग मुझसे ज्यादा अच्छे हैं”, “अब तो बहुत लेट हो गया”। अगर ये विचार आपके दिमाग में घूमेंगे तो आप कभी आगे नही बढ़ पाएँगे। इन विचारों से दूर होना बहुत ज़रूरी है। इनकी बजाय आप पॉज़िटिव सोचने की कोशिश करिए जैसे “पहले नहीं कर पाया, लेकिन आज से कोशिश शुरू करता हूं”। या “हर किसी का अपना रास्ता है, मैं अपनी स्पीड से जा रहा हूं”। और सबसे अच्छा “हर दिन एक नया मौका है”। शुरू में ये सब सुनकर हंसी आएगी, लेकिन 20-30 दिन रोज़ बोलने के बाद दिमाग सच में मानने लगता है। और ये विचार अपने आप आने लगते हैं।

समय का सही इस्तेमाल करना सीखें:

समय का सही इस्तेमाल करना भी बहुत जरूरी है। समय तो सबके पास बराबर है, लेकिन जो इसे सही यूज करते हैं वही आगे निकलते हैं। इसके लिए सुबह उठते ही दिन के 3 सबसे जरूरी काम लिखिए। पहले वो तीनों काम पूरे करने की कोशिश करिए। सोशल मीडिया और यूट्यूब का टाइम भी फिक्स कर लो जैसे बस 45 मिनट। और सबसे मुश्किल लेकिन जरूरी उन चीजों को “नहीं” कहना सीखना जो आपके लक्ष्य से भटकाती हैं, जैसे कोई अनावश्यक पार्टी या किसी से घंटों चैटिंग करना।

स्वास्थ्य का ध्यान रखना बहुत जरूरी है

दोस्तों, अब बात करते हैं स्वास्थ्य की। आप खुद महसूस किए होंगे कि जब शरीर ठीक नहीं होता तो दिमाग भी सही से काम नहीं करता। बेहतर इंसान बनने की सारी कोशिशें तब बेकार लगती हैं जब नींद पूरी नहीं होती या थकान रहती है। इसलिए सबसे पहले शरीर का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। ये छोटी-छोटी बातें हैं पर इनसे बहुत फर्क पड़ता है। जैसे रोज़ 7-8 घंटे की अच्छी नींद लेना।

दिन में कम से कम 20-30 मिनट तो पैदल चलना या हल्की एक्सरसाइज कर लेना। जैसे घर के आस-पास घूम आओ, इससे दिल खुश हो जाता है। खाने में भी ज्यादा प्राकृतिक चीजें डालो जैसे फल, सब्जियां, दाल-चावल, घर का खाना। बाहर का जंक फूड कम करो। और सबसे जरूरी बात रात 10 बजे के बाद फोन को दूर रख दो क्योंकि मोबाइल स्क्रीन देखने से नींद ग़ायब हो जाती है। ये सब करके देखो, एनर्जी लेवल बहुत बढ़ जाता है और फिर बाकी चीजें करने का मन भी करता है।

दूसरों से सीखते रहें:

बेहतर बनने का सबसे तेज रास्ता है दूसरों से सीखना। मतलब अच्छे लोगों की अच्छी आदतें अपना लो! किताबें पढ़ना शुरू करो, भले ही महीने में सिर्फ एक किताब। शुरू में आपको लगेगा किताबें पढ़ना बोरिंग है, लेकिन जब आप छोटी-छोटी मोटिवेशनल किताबें पढ़ेंगे तो उनसे आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। यूट्यूब पर अच्छे लोगों के इंटरव्यू सुनो जैसे कोई सफल व्यक्ति अपनी कहानी बता रहा हो, उसमें से 2-3 बातें नोट कर लो। और सबसे आसान अपने आस-पास के उन लोगों को ध्यान से देखो जो अच्छा कर रहे हैं। वो सुबह जल्दी उठते हैं? वो कैसे बोलते हैं? क्या अलग करते हैं? बस उनकी अच्छी आदतें कॉपी करो। इससे बहुत तेजी से सुधार होता है, क्योंकि खुद से ट्रायल-एरर करने में सालों लग जाते हैं।

निष्कर्ष:

दोस्तों, खुद को बेहतर बनाना कोई एक दिन का काम नहीं है, ये तो एक लंबी यात्रा है। लेकिन अच्छी बात ये है कि इसमें बड़े-बड़े कदमों की जरूरत नहीं, बस छोटे-छोटे कदम रोज़ उठाते रहो। सबसे जरूरी है ‘शुरू करना’। आज से बस एक छोटी सी अच्छी आदत शुरू कर दो, चाहे वो सुबह पानी पीना हो या 10 मिनट पढ़ना। बस इतना काफी है। धीरे-धीरे ये आदतें बढ़ेंगी और तुम खुद को बहुत अलग, बहुत बेहतर महसूस करोगे। वो एहसास बहुत खूबसूरत होता है जब लगता है कि हां, मैं बदल रहा हूं। तो बस शुरुआत कर दो, अभी। बाकी सब धीरे-धीरे अपने आप अच्छा होता जाएगा।